कुरान - 6:19 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
قُلۡ أَيُّ شَيۡءٍ أَكۡبَرُ شَهَٰدَةٗۖ قُلِ ٱللَّهُۖ شَهِيدُۢ بَيۡنِي وَبَيۡنَكُمۡۚ وَأُوحِيَ إِلَيَّ هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانُ لِأُنذِرَكُم بِهِۦ وَمَنۢ بَلَغَۚ أَئِنَّكُمۡ لَتَشۡهَدُونَ أَنَّ مَعَ ٱللَّهِ ءَالِهَةً أُخۡرَىٰۚ قُل لَّآ أَشۡهَدُۚ قُلۡ إِنَّمَا هُوَ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞ وَإِنَّنِي بَرِيٓءٞ مِّمَّا تُشۡرِكُونَ

Transliteration: (Qul ayyu shai'in akbaru shahaadatan qulil laahu shaheedum bainee wa bainakum; wa oohiya ilaiya haazal Qur'aanu li unzirakum bihee wa mam balagh; a'innakum latashhadoona anna ma'al laahi aalihatan ukhraa; qul laaa ashhad; qul innamaa Huwa Ilaahunw Waahidunw wa innanee baree'um mimmaa tushrikoon)

आप फ़रमा दीजिए (ऐ हबीब): "सबसे बड़ी गवाही किसकी है?" [36]
आप फ़रमाइए: "अल्लाह मेरे और तुम्हारे दरमियान गवाह है [37],
और मेरे पास यह क़ुरआन वह्य के ज़रिए भेजा गया है ताकि मैं इसके ज़रिए तुम्हें और जिसे यह पहुँचे, उसे डराऊँ [38][39]।
तो क्या तुम सचमुच गवाही देते हो कि अल्लाह के साथ कुछ और भी माबूद हैं?" [40]
आप फ़रमा दीजिए: "वह तो बस एक ही अल्लाह है, और मैं बिला किसी शक तुम्हारे शिर्क से बरी हूँ।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 19 की तफ़्सीर

✅ [36] सबसे बड़ी गवाही — अल्लाह की

जब कुफ़्फ़ारे मक्का ने नबी ﷺ से आपकी नबूवत पर गवाह माँगी,
तो यह आयत नाज़िल हुई — अल्लाह की गवाही सबसे बड़ी है।
उससे बड़ी और कोई दलील नहीं।

✅ [37] अल्लाह की गवाही — नबी ﷺ के हक़ में

अल्लाह ने नबी ﷺ की सच्चाई पर कई तरीक़ों से गवाही दी:

  • अपने नेक बंदों के ज़रिए
  • ख़ुद क़ुरआन के ज़रिए
  • मुजिज़ात के ज़रिए
    यह साबित करता है कि अल्लाह नबी की गवाही देता है, और नबी अल्लाह की।
    कलिमा "ला इलाहा इल्लल्लाह, मुहम्मदुर रसूलुल्लाह" में यही दोहरी गवाही शामिल है।

✅ [38] क़ुरआन — नबूवत की सबसे बड़ी दलील

अगर नबी ﷺ सच्चे न होते,
तो अल्लाह उनके ऊपर क़ुरआन ना नाज़िल करता।
वही नाज़िल होना ही सबसे बड़ा सबूत है।

✅ [39] हर इंसान के लिए एक ही पैग़ाम

इस क़ुरआन का पैग़ाम हर ज़माने, हर जगह, और हर क़ौम के लिए है।
जो लोग इससे अब तक वाक़िफ़ नहीं हुए, उनके साथ अलग अंदाज़ से बर्ताव किया जाएगा।

✅ [40] तौहीद का खुला ऐलान और शिर्क से किनारा

सच्चा मोमिन हमेशा तौहीद को ज़ाहिर करता है, और शिर्क से खुलकर बेज़ारी का इज़हार करता है।
"तक़य्या" यानी छुपाना — यह मुफ़्क़िरों (मुनाफ़िकों) की आदत है, मोमिनों की नहीं।

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