Transliteration: (Allazeena aatainaa humul Kitaaba ya'rifoonahoo kamaa ya'rifoona abnaaa'ahum; allazeena khasirooo anfusahum fahum laa yu'minoon)
जैसे एक बाप अपने बेटे को बिना किसी शक के पहचानता है,
उसी तरह अहले किताब इस नबी को पहचानते हैं।
उनके पास किताबी निशानियाँ हैं जो नबी मुहम्मद ﷺ की पहचान कराती हैं।
मगर सिर्फ पहचान ही काफ़ी नहीं होती,
हक़ीक़ी ईमान तब होता है जब उसे कुबूल किया जाए और इज़हार किया जाए।
इन लोगों ने जानबूझकर ईमान से इनकार किया,
क्योंकि उनके दिलों में हसद और तकब्बुर था।
उनकी रूहें तबाह हो चुकी हैं,
और अगर तौबा न करें तो कुफ़्र की हालत में ही मरेंगे।
शैतान की तरह, जिनके दिलों में हक़ से जलन होती है,
वही हमेशा सच्चाई का इनकार करते रहते हैं।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat