कुरान - 6:17 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
وَإِن يَمۡسَسۡكَ ٱللَّهُ بِضُرّٖ فَلَا كَاشِفَ لَهُۥٓ إِلَّا هُوَۖ وَإِن يَمۡسَسۡكَ بِخَيۡرٖ فَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

Transliteration: (Wa iny-yamsaskal laahu bidurrin falaaa kaashifa lahoo illaa Huwa wa iny-yamsaska bikhairin fa Huwa 'alaa kulli shai'in Qadeer)

और अगर अल्लाह तुम्हें कोई बुराई पहुँचा दे,
तो उसके सिवा कोई उसे दूर नहीं कर सकता [33]।
और अगर वह तुम्हें भलाई पहुँचा दे,
तो वह हर चीज़ पर पूरी तरह क़ादिर है [34]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 17 की तफ़्सीर

✅ [33] तकलीफ़ से निजात — सिर्फ अल्लाह के हाथ में

यह आयत बयान करती है कि
अगर अल्लाह किसी को तकलीफ़ (बला, बीमारी, मुसीबत) दे,
तो पूरी दुनिया मिलकर भी उसे हटा नहीं सकती,
जब तक अल्लाह खुद न चाहे।

➡️ चाहे वली-ए-कामिल की दुआ हो,
या नेक आमाल का वसीला —
असल में दूर करने वाला सिर्फ अल्लाह ही है।

✅ [34] भलाई देने वाला भी वही, और सबसे ज़्यादा क़ादिर

अगर अल्लाह भलाई देना चाहे —
जैसे रिज़्क़, सेहत, हिदायत, अमन व सकून,
तो कोई ताक़त उसे रोक नहीं सकती।

➡️ क्योंकि वो हर चीज़ पर क़ादिर है।
यही बात तौहीद को साबित करती है —
नुकसान और फायदा दोनों सिर्फ अल्लाह के इख़्तियार में हैं।

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