Transliteration: (Wa iny-yamsaskal laahu bidurrin falaaa kaashifa lahoo illaa Huwa wa iny-yamsaska bikhairin fa Huwa 'alaa kulli shai'in Qadeer)
यह आयत बयान करती है कि
अगर अल्लाह किसी को तकलीफ़ (बला, बीमारी, मुसीबत) दे,
तो पूरी दुनिया मिलकर भी उसे हटा नहीं सकती,
जब तक अल्लाह खुद न चाहे।
➡️ चाहे वली-ए-कामिल की दुआ हो,
या नेक आमाल का वसीला —
असल में दूर करने वाला सिर्फ अल्लाह ही है।
अगर अल्लाह भलाई देना चाहे —
जैसे रिज़्क़, सेहत, हिदायत, अमन व सकून,
तो कोई ताक़त उसे रोक नहीं सकती।
➡️ क्योंकि वो हर चीज़ पर क़ादिर है।
यही बात तौहीद को साबित करती है —
नुकसान और फायदा दोनों सिर्फ अल्लाह के इख़्तियार में हैं।
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