कुरान - 6:23 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
ثُمَّ لَمۡ تَكُن فِتۡنَتُهُمۡ إِلَّآ أَن قَالُواْ وَٱللَّهِ رَبِّنَا مَا كُنَّا مُشۡرِكِينَ

Transliteration: (Summa lam takun fitnatuhum illaaa an qaaloo wallaahi Rabbinaa maa kunnaa mushrikeen)

फिर उनके पास कोई चाल न चलेगी, सिवाय इसके कि कहें: "ख़ुदा की क़सम, ऐ हमारे रब! हम तो मुशरिक न थे" [46] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 23 की तफ़्सीर

✅ [46] मायूसी में जानबूझ कर बोला गया झूठ

क़ियामत के दिन मुशरिक अपनी शिर्क की हरकतों से इंकार करने की कोशिश करेंगे,
और कहेंगे: "ख़ुदा की क़सम, ऐ हमारे रब! हम तो मुशरिक न थे।"
यह बात किसी ग़लती या भूल से नहीं, बल्कि जानबूझ कर कही गई झूठी बात होगी।
क्योंकि अल्लाह फ़रमाता है:
"उस दिन इंसान को उसकी सारी कोशिशें याद आ जाएंगी" (सूरा 79:35) —
इससे साबित होता है कि हर शख़्स को अपने सारे आमाल का पूरा इल्म होगा।
इसलिए जब कहा गया कि "उन्होंने अपने ख़िलाफ़ झूठ बोला",
तो इसका मतलब यही है कि उनका यह इंकार एक सोचा-समझा झूठ था,
और आयत का मफ़हूम बिल्कुल वाज़ेह और बेहतरीन अंदाज़ में सामने आता है।

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