कुरान - 6:49 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
وَٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا يَمَسُّهُمُ ٱلۡعَذَابُ بِمَا كَانُواْ يَفۡسُقُونَ

Transliteration: (Wallazeena kazzaboo bi Aayaatinaa yamassuhumul 'azaabu bimaa kaanoo yafsuqoon)

और जो लोग हमारी आयतों को झुठलाते हैं, उन्हें उनके ज़र्रानें (सिरकशी/गुनाहों) की वजह से अज़ाब छू कर रहेगा। [95] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 49 की तफ़्सीर

✅ [95] अज़ाब उन पर, जो इनकार करते हैं

  • इस आयत में जिन लोगों की बात हो रही है, वह वे हैं जो अल्लाह की निशानियों को जान-बूझकर झुठलाते हैं।
  • यहां "ज़र्र" यानी नाफ़रमानी का मतलब है कुफ्र — और अज़ाब से मुराद है हमेशा की जहन्नम।
  • यह बात साफ़ है कि जो लोग मासूम हैं, जैसे कि काफ़िरों के बच्चे, वे इस अज़ाब में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उन्होंने शख़्सी तौर पर कोई इनकार या गुनाह नहीं किया।

नतीजा: अज़ाब का नज़ूल सिर्फ़ उन पर होता है, जिन्होंने होश और समझ के साथ हक़ को ठुकराया।

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