कुरान - 6:51 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
وَأَنذِرۡ بِهِ ٱلَّذِينَ يَخَافُونَ أَن يُحۡشَرُوٓاْ إِلَىٰ رَبِّهِمۡ لَيۡسَ لَهُم مِّن دُونِهِۦ وَلِيّٞ وَلَا شَفِيعٞ لَّعَلَّهُمۡ يَتَّقُونَ

Transliteration: (Wa anzir bihil lazeena yakhaafoona ai yuhsharooo ilaa Rabbihim laisa lahum min doonihee waliyyunw wa laa shafee'ul la'allahum yattaqoon)

और इस क़ुरआन के ज़रिए उन्हें डराओ जो इस बात से डरते हैं कि वे अपने रब की तरफ़ उठाए जाएँगे — उनके लिए अल्लाह के सिवा कोई सहायक [100] और कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं होगा — ताकि वे परहेज़गार बन जाएँ। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-अनआम – आयत 51

✅ [100] सिफ़ारिश परहेज़गारों के लिए, इंकार करने वालों के लिए नहीं

यह आयत उन लोगों के लिए चेतावनी है जो आख़िरत पर ईमान रखते हैं और अपने रब के सामने उठाए जाने से डरते हैं। इसमें बताया गया है कि उनके लिए अल्लाह के अलावा कोई मददगार या सिफ़ारिश करने वाला नहीं होगा। इससे यह समझ आता है कि ईमानवालों को अल्लाह की रहमत से सिफ़ारिश करने वाले मिलेंगे, जबकि काफ़िरों को इससे महरूम रखा जाएगा — और यही उनकी सज़ा का हिस्सा है। इसलिए अगर कोई कहे कि उसका कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं है, तो वह दरअसल कुफ़्र की हालत को बयान कर रहा है। आयत नरमी से लोगों को परहेज़गार बनने की तरग़ीब देती है ताकि वे उस दिन अकेले न छोड़ दिए जाएँ।

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