कुरान - 6:53 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
وَكَذَٰلِكَ فَتَنَّا بَعۡضَهُم بِبَعۡضٖ لِّيَقُولُوٓاْ أَهَـٰٓؤُلَآءِ مَنَّ ٱللَّهُ عَلَيۡهِم مِّنۢ بَيۡنِنَآۗ أَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِأَعۡلَمَ بِٱلشَّـٰكِرِينَ

Transliteration: (Wa kazaalika fatannaa ba'dahum biba'dil liyaqoolooo ahaaa'ulaaa'i mannal laahu 'alaihim mim baininaa; alaisal laahu bi-a'lama bish shaakireen)

और इसी तरह हमने उनमें से कुछ को दूसरों के लिए आज़माइश बना दिया, ताकि जब अमीर काफ़िर ग़रीब मुसलमानों को देखें तो कहें — क्या यही लोग हैं जिन पर अल्लाह ने हम पर फ़ज़ीलत दी है? [105] क्या अल्लाह उन लोगों को बेहतर नहीं जानता जो शुक्रगुज़ार हैं? [106] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 53 की तफ़्सीर

✅ [105] दौलत बनाम हक़ — सोच की आज़माइश

अल्लाह ने अमीर और ग़रीब को अलग-अलग दर्जों में रखकर एक-दूसरे के लिए इम्तेहान बनाया। अमीर काफ़िरों ने ग़रीब मुसलमानों का मज़ाक उड़ाया और तअज्जुब किया कि नीची हैसियत वाले कैसे अल्लाह के पसंदीदा हो सकते हैं।
ये वही ग़लत सोच है जिसमें दौलत को हक़ की निशानी समझा जाता है, जबकि असल दर्जा ईमान और तक़वा का है, न कि माल और रुतबे का।

✅ [106] हिदायत शुक्रगुज़ारों के लिए है

अल्लाह सबसे बेहतर जानता है कि कौन उसकी हिदायत का हक़दार है। माल नहीं, बल्कि शुक्रगुज़ारी और सच्चाई असल पैमाना है।
ईमान और हिदायत अल्लाह का तोहफ़ा है, जो उसे मिलता है जो दिल से शुक्र अदा करे और सच्चा हो — चाहे उसका दुनिया में कोई रुतबा न हो।

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