कुरान - 6:81 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

81
وَكَيۡفَ أَخَافُ مَآ أَشۡرَكۡتُمۡ وَلَا تَخَافُونَ أَنَّكُمۡ أَشۡرَكۡتُم بِٱللَّهِ مَا لَمۡ يُنَزِّلۡ بِهِۦ عَلَيۡكُمۡ سُلۡطَٰنٗاۚ فَأَيُّ ٱلۡفَرِيقَيۡنِ أَحَقُّ بِٱلۡأَمۡنِۖ إِن كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa kaifa akhaafu maaa ashraktum wa laa takhaafoona annakum ashraktum billaahi maa lam yunazzil bihee 'alaikum sultaanaa; fa aiyul fareeqaini ahaqqu bil amni in kuntum ta'lamoon)

और मुझे क्यों डर होना चाहिए उनसे, जिनको तुम अल्लाह का शरीक ठहराते हो [162], जबकि तुम उससे नहीं डरते कि तुमने अल्लाह के साथ (ऐसी चीज़ों को) शरीक ठहराया, जिनके लिए उसने तुम्हें कोई दलील नहीं दी? तो दोनों गिरोहों में से किसे ज़्यादा हक़ है अम्न (सुरक्षा) का? (बताओ) अगर तुम जानते हो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 81 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-अनआम – आयत 81

✅ [162] बेकार बुतों से डरने का कोई कारण नहीं

हज़रत इब्राहीम عليه السلام ने अपनी क़ौम के डराने पर उनकी सोच को चुनौती दी। वे लकड़ी और पत्थर के बेजान बुतों से डरते थे, लेकिन अल्लाह से नहीं डरते थे, जो सब पर क़ादिर है। असल डर उसी का होना चाहिए, जिसके पास असली इख़्तियार हो।

✅ [163] अम्न का हक़ सिर्फ़ तौहीद वालों को

इब्राहीम عليه السلام ने सवाल उठाया कि असली अम्न किसको मिलेगा—अल्लाह की इबादत करने वालों को या शिर्क करने वालों को? जवाब साफ़ है: अम्न और निजात सिर्फ़ तौहीद वालों के लिए है, जबकि शिर्क करने वाले अज़ाब के हक़दार हैं।

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