Transliteration: (Wa kaifa akhaafu maaa ashraktum wa laa takhaafoona annakum ashraktum billaahi maa lam yunazzil bihee 'alaikum sultaanaa; fa aiyul fareeqaini ahaqqu bil amni in kuntum ta'lamoon)
हज़रत इब्राहीम عليه السلام ने अपनी क़ौम के डराने पर उनकी सोच को चुनौती दी। वे लकड़ी और पत्थर के बेजान बुतों से डरते थे, लेकिन अल्लाह से नहीं डरते थे, जो सब पर क़ादिर है। असल डर उसी का होना चाहिए, जिसके पास असली इख़्तियार हो।
इब्राहीम عليه السلام ने सवाल उठाया कि असली अम्न किसको मिलेगा—अल्लाह की इबादत करने वालों को या शिर्क करने वालों को? जवाब साफ़ है: अम्न और निजात सिर्फ़ तौहीद वालों के लिए है, जबकि शिर्क करने वाले अज़ाब के हक़दार हैं।
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