कुरान - 29:26 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
۞فَـَٔامَنَ لَهُۥ لُوطٞۘ وَقَالَ إِنِّي مُهَاجِرٌ إِلَىٰ رَبِّيٓۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ

Transliteration: (Fa aamana lahoo Loot; wa qaala innee muhajirun ilaa Rabbee innahoo Huwal 'Azeezul Hakeem)

तो लूत उन पर ईमान ले आए [58]; और (इब्राहीम ने) कहा, 'बेशक मैं अपने रब की तरफ़ हिजरत करने वाला हूँ [59]; बेशक वही ज़बरदस्त (ग़ालिब), बड़ी हिकमत वाला है [60]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 26

"तो लूत उन पर ईमान ले आए [58]; और (इब्राहीम ने) कहा, 'बेशक मैं अपने रब की तरफ़ हिजरत करने वाला हूँ [59]; बेशक वही ज़बरदस्त (ग़ालिब), बड़ी हिकमत वाला है [60]।'"

[58] हज़रत लूत अलैहिस्सलाम का ईमान

हज़रत लूत (जो हज़रत इब्राहीम के भतीजे थे) सबसे पहले हज़रत इब्राहीम पर ईमान लाए और बाद में अल्लाह ने उन्हें भी नबुव्वत अता फ़रमाई।

[59] अल्लाह की ख़ातिर हिजरत

हज़रत इब्राहीम ने इराक (बाबिल) के कुफ़्रिया माहौल को छोड़कर मुल्क-ए-शाम और मिस्र की तरफ़ हिजरत फ़रमाई ताकि आज़ादी से अल्लाह की इबादत कर सकें।

[60] ज़बरदस्त हिकमत वाला परवरदिगार

अल्लाह हर मुहाजिर और दीन के मददगार का मुहाफ़िज़ है।

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