Transliteration: (Fa aamana lahoo Loot; wa qaala innee muhajirun ilaa Rabbee innahoo Huwal 'Azeezul Hakeem)
"तो लूत उन पर ईमान ले आए [58]; और (इब्राहीम ने) कहा, 'बेशक मैं अपने रब की तरफ़ हिजरत करने वाला हूँ [59]; बेशक वही ज़बरदस्त (ग़ालिब), बड़ी हिकमत वाला है [60]।'"
हज़रत लूत (जो हज़रत इब्राहीम के भतीजे थे) सबसे पहले हज़रत इब्राहीम पर ईमान लाए और बाद में अल्लाह ने उन्हें भी नबुव्वत अता फ़रमाई।
हज़रत इब्राहीम ने इराक (बाबिल) के कुफ़्रिया माहौल को छोड़कर मुल्क-ए-शाम और मिस्र की तरफ़ हिजरत फ़रमाई ताकि आज़ादी से अल्लाह की इबादत कर सकें।
अल्लाह हर मुहाजिर और दीन के मददगार का मुहाफ़िज़ है।
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