Transliteration: (Famaa kaana jawaaba qawmiheee illaaa an qaaluqtuloohu aw harriqoohu fa anjaahul laahu minan naar; inna fee zaalika la Aayaatil li qawminy yu'minoon)
"तो इब्राहीम की क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने कहा, 'इन्हें क़त्ल कर दो या इन्हें जला डालो [50]!' तो अल्लाह ने उन्हें आग से बचा लिया [51]; बेशक इसमें ईमान लाने वालों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं [52]।"
जब हज़रत इब्राहीम ने दलीलों से उनके बुतों को बातिल साबित कर दिया, तो वे ला-जवाब होकर ज़ुल्म पर उतर आए और कहने लगे कि इन्हें आग के बड़े दहकते हुए अलाव में फेंक कर जला दो।
नमरूद ने मिजनीक़ (गुलेल) के ज़रिए हज़रत इब्राहीम को आग में डाला, मगर अल्लाह ने हुक्म दिया: "ऐ आग! ठंडी और सलामती वाली हो जा!" और आग उनके लिए महकता हुआ बाग़ बन गई।
आग का न जलाना इस बात की खुली निशानी है कि कायनात की हर चीज़ अल्लाह के हुक्म के ताबे है।
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