कुरान - 29:24 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوۡمِهِۦٓ إِلَّآ أَن قَالُواْ ٱقۡتُلُوهُ أَوۡ حَرِّقُوهُ فَأَنجَىٰهُ ٱللَّهُ مِنَ ٱلنَّارِۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Famaa kaana jawaaba qawmiheee illaaa an qaaluqtuloohu aw harriqoohu fa anjaahul laahu minan naar; inna fee zaalika la Aayaatil li qawminy yu'minoon)

तो इब्राहीम की क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने कहा, 'इन्हें क़त्ल कर दो या इन्हें जला डालो [50]!' तो अल्लाह ने उन्हें आग से बचा लिया [51]; बेशक इसमें ईमान लाने वालों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं [52]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 24

"तो इब्राहीम की क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने कहा, 'इन्हें क़त्ल कर दो या इन्हें जला डालो [50]!' तो अल्लाह ने उन्हें आग से बचा लिया [51]; बेशक इसमें ईमान लाने वालों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं [52]।"

[50] नमरूदियों की ज़ालिमाना साज़िश

जब हज़रत इब्राहीम ने दलीलों से उनके बुतों को बातिल साबित कर दिया, तो वे ला-जवाब होकर ज़ुल्म पर उतर आए और कहने लगे कि इन्हें आग के बड़े दहकते हुए अलाव में फेंक कर जला दो।

[51] आग का गुलज़ार बन जाना

नमरूद ने मिजनीक़ (गुलेल) के ज़रिए हज़रत इब्राहीम को आग में डाला, मगर अल्लाह ने हुक्म दिया: "ऐ आग! ठंडी और सलामती वाली हो जा!" और आग उनके लिए महकता हुआ बाग़ बन गई।

[52] अहले ईमान के लिए अज़ीम मोजिज़ा

आग का न जलाना इस बात की खुली निशानी है कि कायनात की हर चीज़ अल्लाह के हुक्म के ताबे है।

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