Transliteration: (Wa maaa antum bimu'jizeena fil ardi wa laa fissamaaa'i wa maa lakum min doonil laahi minw waliyyinw wa laa naseer (section 2))
"और तुम न तो ज़मीन में (अल्लाह को) आजिज़ कर सकते हो और न आसमान में [46]; और अल्लाह के सिवा न तुम्हारा कोई हिमायती है और न कोई मददगार [47]।"
इंसान चाहे ज़मीन के किसी कोने में छुप जाए या आसमान की बुलंदियों में चला जाए, वह अल्लाह की पकड़ से कभी नहीं बच सकता।
अल्लाह के मुक़ाबले में काफ़िरों का न कोई दोस्त होगा और न कोई मददगार जो उन्हें अज़ाब से छुड़ा सके।
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