कुरान - 29:22 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
وَمَآ أَنتُم بِمُعۡجِزِينَ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا فِي ٱلسَّمَآءِۖ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ مِن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖ

Transliteration: (Wa maaa antum bimu'jizeena fil ardi wa laa fissamaaa'i wa maa lakum min doonil laahi minw waliyyinw wa laa naseer (section 2))

और तुम न तो ज़मीन में (अल्लाह को) आजिज़ कर सकते हो और न आसमान में [46]; और अल्लाह के सिवा न तुम्हारा कोई हिमायती है और न कोई मददगार [47]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 22

"और तुम न तो ज़मीन में (अल्लाह को) आजिज़ कर सकते हो और न आसमान में [46]; और अल्लाह के सिवा न तुम्हारा कोई हिमायती है और न कोई मददगार [47]।"

[46] इलाही क़ुदरत से फ़रार ना-मुम्किन

इंसान चाहे ज़मीन के किसी कोने में छुप जाए या आसमान की बुलंदियों में चला जाए, वह अल्लाह की पकड़ से कभी नहीं बच सकता।

[47] काफ़िरों का कोई मददगार नहीं

अल्लाह के मुक़ाबले में काफ़िरों का न कोई दोस्त होगा और न कोई मददगार जो उन्हें अज़ाब से छुड़ा सके।

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