कुरान - 29:23 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ وَلِقَآئِهِۦٓ أُوْلَـٰٓئِكَ يَئِسُواْ مِن رَّحۡمَتِي وَأُوْلَـٰٓئِكَ لَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ

Transliteration: (Wallazeena kafaroo bi Aayaatil laahi wa liqaaa'iheee ulaaa'ika ya'isoo mir rahmatee wa ulaaa'ika lahum 'azaabun aleem)

और जिन लोगों ने अल्लाह की आयात और उससे मुलाक़ात का इनकार किया, वही लोग मेरी रहमत से नाउम्मीद हुए [48]; और उन्हीं के लिए दर्दनाक अज़ाब है [49]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 23

"और जिन लोगों ने अल्लाह की आयात और उससे मुलाक़ात का इनकार किया, वही लोग मेरी रहमत से नाउम्मीद हुए [48]; और उन्हीं के लिए दर्दनाक अज़ाब है [49]।"

[48] रहमत-ए-इलाही से नाउम्मीदी

जो लोग अल्लाह की तौहीद, क़ुरआन और क़ियामत का इनकार करते हैं, वे अल्लाह की वसीअ रहमत से महरूम हो चुके हैं।

[49] दर्दनाक अज़ाब

उनके इस हठधर्मी और कुफ़्र के सबब उनके लिए जहन्नम का दर्दनाक और दायमी अज़ाब तैयार है।

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