कुरान - 29:21 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
يُعَذِّبُ مَن يَشَآءُ وَيَرۡحَمُ مَن يَشَآءُۖ وَإِلَيۡهِ تُقۡلَبُونَ

Transliteration: (Yu'azzibu many yashaaa'u wa yarhamu many yashaaa'; wa ilaihi tuqlaboon)

वह जिसे चाहता है अज़ाब देता है और जिस पर चाहता है रहम फ़रमाता है [45]; और उसी की तरफ़ तुम सब पलटाए जाओगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 21

"वह जिसे चाहता है अज़ाब देता है और जिस पर चाहता है रहम फ़रमाता है [45]; और उसी की तरफ़ तुम सब पलटाए जाओगे।"

[45] अद्ल और रहमत का मुतलक़ इख़्तियार

अल्लाह तआला अपने अद्ल व हिकमत से मुजरिमों और नाफ़रमानों को सज़ा देता है और अपने फ़ज़्ल व करम से तौबा करने वाले मोमिनीन पर रहम फ़रमाता है। कोई उसके हुक्म पर रोक-टोक नहीं कर सकता।

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