Transliteration: (Yu'azzibu many yashaaa'u wa yarhamu many yashaaa'; wa ilaihi tuqlaboon)
"वह जिसे चाहता है अज़ाब देता है और जिस पर चाहता है रहम फ़रमाता है [45]; और उसी की तरफ़ तुम सब पलटाए जाओगे।"
अल्लाह तआला अपने अद्ल व हिकमत से मुजरिमों और नाफ़रमानों को सज़ा देता है और अपने फ़ज़्ल व करम से तौबा करने वाले मोमिनीन पर रहम फ़रमाता है। कोई उसके हुक्म पर रोक-टोक नहीं कर सकता।
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