कुरान - 29:69 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

69
وَٱلَّذِينَ جَٰهَدُواْ فِينَا لَنَهۡدِيَنَّهُمۡ سُبُلَنَاۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَمَعَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

Transliteration: (Wallazeena jaahadoo feenaa lanahdiyannahum subulana; wa innal laaha lama'al muhsineen (section 7))

और जिन लोगों ने हमारी राह में कोशिश (मुजाहिदा) की, हम ज़रूर उन्हें अपने रास्ते दिखाएंगे [167]; और बेशक अल्लाह नेकी करने वालों (मुहसिनीन) के साथ है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 69 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 69

"और जिन लोगों ने हमारी राह में कोशिश (मुजाहिदा) की, हम ज़रूर उन्हें अपने रास्ते दिखाएंगे [167]; और बेशक अल्लाह नेकी करने वालों (मुहसिनीन) के साथ है।"

[167] मुजाहिदा और हिदायत-ए-इलाही

यह सूरह की आख़िरी आयत एक अज़ीम बशारत है: जो बंदे अल्लाह की रज़ा के लिए अपनी जान, माल, इल्म और नफ़्स के ख़िलाफ़ कोशिश व जिहाद करते हैं, अल्लाह तआला ज़रूर उनके लिए अपनी क़ुर्बत और मअरिफ़त के रास्ते खोल देता है। जो इल्म पर अमल करता है, अल्लाह उसे उन उलूम की समझ बख़्श देता है जो वह नहीं जानता था। अल्लाह तआला की ख़ास रहमत, नुसरत और ताईद हमेशा मुहसिनीन (नेकोकारों) के साथ रहती है।

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