कुरान - 29:63 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
وَلَئِن سَأَلۡتَهُم مَّن نَّزَّلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَحۡيَا بِهِ ٱلۡأَرۡضَ مِنۢ بَعۡدِ مَوۡتِهَا لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُۚ قُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِۚ بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Wa la'in sa altahum man nazzala minas samaaa'i maaa'an fa ahyaa bihil arda min ba'di mawtihaa la yaqoolunnal laah; qulil hamdu lillah; bal aksaruhum laa ya'qiloon (section 6))

और अगर आप उनसे पूछें कि आसमान से पानी किसने बरसाया फिर उसके ज़रिये ज़मीन को उसके मुर्दा होने के बाद ज़िंदा कर दिया, तो वे ज़रूर कहेंगे कि 'अल्लाह ने!' [152] आप कह दीजिए, 'तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं' [153]; बल्कि उनमें से अक्सर अक़्ल नहीं रखते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 63

"और अगर आप उनसे पूछें कि आसमान से पानी किसने बरसाया फिर उसके ज़रिये ज़मीन को उसके मुर्दा होने के बाद ज़िंदा कर दिया, तो वे ज़रूर कहेंगे कि 'अल्लाह ने!' [152] आप कह दीजिए, 'तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं' [153]; बल्कि उनमें से अक्सर अक़्ल नहीं रखते।"

[152] बारिश और मुर्दा ज़मीन का ज़िंदा होना

मुशरिकीन इस बात को भी मानते थे कि आसमान से बारिश बरसाना और सूखी मुर्दा ज़मीन को सब्ज़-ओ-शादाब करना सिर्फ़ अल्लाह का काम है। जब पैदा करने वाला, बारिश बरसाने वाला और रिज़्क़ देने वाला सिर्फ़ वही है, तो फिर पत्थरों के तराशे हुए बुतों की इबादत करना कितनी बड़ी बे-अक़्ली और खुली गुमराही है।

[153] हम्द-ओ-सना का मुस्तहिक़ सिर्फ़ अल्लाह

आप फ़रमाइए: "अलहम्दुलिल्लाह" (तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं) कि हुज्जत क़ायम हो गई और उन्होंने ख़ुद अपने मुँह से हक़ीक़त का इक़रार कर लिया। मगर अफ़सोस कि अक्सर मुशरिकीन अक़्ल से काम नहीं लेते और अपने ही इक़रार के ख़िलाफ़ शिर्क में पड़े रहते हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now