कुरान - 29:61 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
وَلَئِن سَأَلۡتَهُم مَّنۡ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَسَخَّرَ ٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَ لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُۖ فَأَنَّىٰ يُؤۡفَكُونَ

Transliteration: (Wa la'in sa altahum man khalaqas samaawaati wal arda wa sakhkharash shamsa wal qamara la yaqoolunnal laahu fa anna yu'fakoon)

और अगर आप उनसे पूछें कि आसमानों और ज़मीन को किसने पैदा किया और सूरज और चाँद को किसने काम में लगाया, तो वे ज़रूर कहेंगे कि 'अल्लाह ने!' फिर वे किधर बहके जा रहे हैं [149]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 61

"और अगर आप उनसे पूछें कि आसमानों और ज़मीन को किसने पैदा किया और सूरज और चाँद को किसने काम में लगाया, तो वे ज़रूर कहेंगे कि 'अल्लाह ने!' फिर वे किधर बहके जा रहे हैं [149]?"

[149] मुशरिकीन का तज़ाद और रिसालत की अहमियत

मुशरिकीने मक्का इस बात का इक़रार करते थे कि आसमानों और ज़मीन का ख़ालिक़ और सूरज व चाँद को मुसख़्ख़र करने वाला सिर्फ़ अल्लाह है। इसके बावजूद वे बुतों की पूजा करते थे और रसूलुल्लाह ﷺ की रिसालत का इंकार करते थे। इससे साबित हुआ कि सिर्फ़ अल्लाह को ख़ालिक़ मान लेना नजात के लिए काफ़ी नहीं, जब तक कि रसूलुल्लाह ﷺ की रिसालत और आपकी ताज़ीयत पर मुकम्मल ईमान न लाया जाए।

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