कुरान - 29:60 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

60
وَكَأَيِّن مِّن دَآبَّةٖ لَّا تَحۡمِلُ رِزۡقَهَا ٱللَّهُ يَرۡزُقُهَا وَإِيَّاكُمۡۚ وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ

Transliteration: (Wa ka ayyim min daaabbatil laa tahmilu rizqahaa; al laahu yarzuquhaa wa iyyaakum; wa Huwas Samee'ul Aleem)

और ज़मीन पर कितने ही चलने वाले जानदार ऐसे हैं जो अपना रिज़्क़ उठाए नहीं फिरते [146]; अल्लाह ही उन्हें रिज़्क़ देता है और तुम्हें भी [147]; और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है [148]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 60

"और ज़मीन पर कितने ही चलने वाले जानदार ऐसे हैं जो अपना रिज़्क़ उठाए नहीं फिरते [146]; अल्लाह ही उन्हें रिज़्क़ देता है और तुम्हें भी [147]; और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है [148]।"

[146] मख़लूक़ात और रिज़्क़ का निज़ाम

उलमा फ़रमाते हैं कि पूरी मख़लूक़ में सिर्फ़ तीन जानदार (इंसान, चींटी और चूहा) ऐसे हैं जो अपनी ग़िज़ा ज़ख़ीरा करके रखते हैं। बाक़ी लाखों परिंदे, चौपाए, हाथी, दरिंदे और समंदरी मख़लूक़ात सुबह ख़ाली पेट निकलते हैं और शाम को पेट भर कर लौटते हैं; वे अपना रिज़्क़ जमा करके नहीं रखते। फिर भी अल्लाह किसी को भूखा नहीं सुलाता।

[147] हक़ीक़ी राज़िक़ सिर्फ़ अल्लाह है

अल्लाह तआला ही तमाम परिंदों, जानवरों और इंसानों को रिज़्क़ अता फ़रमाता है। जो ज़ात जंगल के जानवरों और हवा में उड़ने वाले परिंदों को रोज़ी देती है, क्या वह अपने उन बंदों को भूखा रखेगी जो उसके दीन की ख़ातिर घर-बार छोड़ कर हिजरत करते हैं? हदीस में फ़रमाया गया: "अगर तुम अल्लाह पर वैसा तवक्कुल करो जैसा करने का हक़ है, तो तुम्हें भी परिंदों की तरह रिज़्क़ दिया जाए।"

[148] समीअ व अलीम

अल्लाह तआला तुम्हारी हर फ़रियाद और दुआ सुनने वाला है और तुम्हारी हर हाजत व ज़रूरत को ख़ूब जानने वाला है।

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