Transliteration: (Allazeena sabaroo wa 'alaa Rabbihim yatawakkaloon)
"वे जिन्होंने सब्र किया और वे अपने रब ही पर भरोसा (तवक्कुल) रखते हैं [145]।"
जब सहाबा-ए-किराम को हिजरत का हुक्म हुआ तो बाज़ हज़रात के दिल में यह ख़याल आया कि परदेस में न घर-बार होगा, न रिज़्क़ का ज़रिया, तो गुज़र-बसर कैसे होगी? इस पर अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि जो लोग अल्लाह की राह में सब्र करते हैं और तमाम अस्बाब से कटकर सिर्फ़ अपने रब की ज़ात पर तवक्कुल करते हैं, अल्लाह उनके लिए ऐसी राहें खोल देता है जिनका कोई तसव्वुर भी नहीं कर सकता।
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