Transliteration: (Kullu nafsin zaaa'iqatul mawti summa ilainaa turja'oon)
"हर जान को मौत का मज़ा चखना है [142], फिर तुम सब हमारी ही तरफ़ पलटाए जाओगे।"
क़ायनात की हर जानदार मख़लूक़ को मौत का मज़ा चखना है, कोई भी इस दुनिया में हमेशा रहने वाला नहीं। मौत फ़नाए महज़ नहीं बल्कि एक आलम से दूसरे आलम में मुंतक़िल होने का नाम है। अम्बिया-ए-किराम और औलिया-ए-इज़ाम भी मौत का मज़ा चखते हैं, मगर उसके बाद उन्हें उनके बरज़ख़ी मक़ाम पर दायमी और हक़ीक़ी रूहानी हयात अता की जाती है। आख़िरकार सबको अल्लाह की बारगाह में पेश होना है।
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