कुरान - 29:62 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

62
ٱللَّهُ يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦ وَيَقۡدِرُ لَهُۥٓۚ إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٞ

Transliteration: (Allaahu yabsutur rizqa limany yashaaa'u min 'ibaadihee wa yaqdiru lah; innal laaha bikulli shai'in Aleem)

अल्लाह अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है रिज़्क़ कुशादा (ज़्यादा) कर देता है और जिसके लिए चाहता है तंग कर देता है [150]; बेशक अल्लाह हर चीज़ को ख़ूब जानने वाला है [151]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 62

"अल्लाह अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है रिज़्क़ कुशादा (ज़्यादा) कर देता है और जिसके लिए चाहता है तंग कर देता है [150]; बेशक अल्लाह हर चीज़ को ख़ूब जानने वाला है [151]।"

[150] रिज़्क़ की कुशादगी और तंगी हिकमत पर मबनी

अल्लाह तआला अपनी हिकमत के मुताबिक़ जिसे चाहता है बे-हिसाब रिज़्क़ अता फ़रमाता है और जिसे चाहता है तंग दस्ती में रखता है। दुनिया की दौलत अल्लाह की रज़ा या नाराज़गी का पैमाना नहीं है। बाज़ नेक बंदों और औलिया को फ़क़्र में रखकर आला मक़ाम दिया जाता है, और बाज़ मुनकिरों को ढील देने के लिए माल-ओ-दौलत के ढेर दिए जाते हैं।

[151] अल्लाह का मुकम्मल इल्म

अल्लाह तआला हर बंदे की क़ाबिलियत और उसके नफ़्स के अहवाल को ख़ूब जानता है। वह जानता है कि किस बंदे के हक़ में दौलतमंदी बेहतर है और किसके हक़ में फ़क़्र व तंगदस्ती मुफ़ीद है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now