Transliteration: (Wa man azlamu mimma nif taraa 'alal laahi kaziban aw kazzaba bilhaqqi lammaa jaaa'ah; alaisa fee jahannama maswal lil kaafireen)
"और उस शख़्स से बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठा बोहतान बांधे [163] या हक़ को झुठलाए जब वह उसके पास आ चुका हो [164]? क्या काफ़िरों का ठिकाना जहन्नुम में नहीं है [165]?"
उससे बड़ा ज़ालिम कोई नहीं जो अल्लाह की तरफ़ झूठी बातें मंसूब करे—जैसे बुतों को अल्लाह का शरीक ठहराना, या फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियां कहना, या अपनी तरफ़ से झूठे अहकाम गढ़कर उन्हें शरीअत बताना।
यहाँ "हक़" से मुराद क़ुरआन मजीद और ख़ुद हुज़ूर नबी-ए-रहमत ﷺ की ज़ात-ए-मुबारका है। जब हक़ तमाम वाज़ेह दलीलों और मौजिज़ात के साथ उनके सामने आ गया, तो जिन्होंने हठधर्मी से उसका इंकार किया, उन्होंने अपनी जानों पर ज़ुल्म की इन्तिहा कर दी। हुज़ूर ﷺ मुजस्सम हक़ हैं और आपका हर क़ौल-ओ-फ़ेल ऐन हक़ है।
जो लोग जान-बूझकर अल्लाह पर बोहतान बांधते हैं और उसके सच्चे रसूल की तकज़ीब करते हैं, उनका आख़िरी ठिकाना जहन्नुम की आग है जहाँ वे हमेशा ज़िल्लत और अज़ाब में मुब्तला रहेंगे।
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