Transliteration: (Li yakfuroo bimaaa aatainaahum wa li yatamatta'oo fasaw fa ya'lamoon)
"ताकि वे उसकी ना-शुक्री करें जो कुछ हमने उन्हें दिया है [159], और ताकि वे कुछ फ़ायदा उठा लें; पस अनक़रीब वे जान लेंगे!"
अल्लाह तआला ने उन्हें समंदर की हलाकत से नजात दी, मगर उन्होंने शुक्रगुज़ारी के बजाए ना-शुक्री और कुफ़्र का रास्ता चुना। दुनिया की चंद रोज़ा ज़िंदगी में जो ऐश कर सकते हैं कर लें, बहुत जल्द मौत के वक़्त और क़यामत के दिन उन्हें अपने इस कुफ़्र का अंजाम मालूम हो जाएगा।
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