Transliteration: (Wa qaala innamat takhaz tum min doonil laahi awsaanam mawaddata bainikum fil hayaatid dunyaa summa Yawmal Qiyaamati yakfuru ba'dukum biba'dinw wa yal'anu ba'dukum ba'danw wa ma'waakumun Naaru wa maa lakum min naasireen)
"और इब्राहीम ने कहा, 'तुमने तो अल्लाह को छोड़कर इन बुतों को सिर्फ़ दुनियावी ज़िंदगी में आपसी दोस्ती (और मेल-जोल) का ज़रीआ बना रखा है [53]; फिर क़यामत के दिन तुममें से बाज़ बाज़ का इंकार करेंगे [54] और एक-दूसरे पर लानत भेजेंगे [55]; और तुम्हारा ठिकाना आग होगी [56], और तुम्हारा कोई मददगार न होगा [57]।'"
हज़रत इब्राहीम ने फ़रमाया कि तुमने अपने क़ौमी मेल-जोल और रस्म-ओ-रिवाज को बरक़रार रखने के लिए इन बुतों को माबूद बना रखा है ताकि तुम्हारी बिरादरी मुत्तहिद रहे।
मगर क़ियामत के दिन यह झूठी दोस्ती दुश्मनी में बदल जाएगी; पैरोकार अपने पेशवाओं को कोसेंगे और पेशवा अपने पैरोकारों से मुकर जाएंगे।
वे एक-दूसरे पर लानत भेजेंगे कि तुम्हारी वजह से हम गुमराह हुए और जहन्नम के मुस्तहिक़ बने।
उन सबका मुश्तरका ठिकाना दोज़ख़ की दहकती हुई आग होगी।
उस दिन कोई उनकी मदद या शफ़ाअत करने वाला न होगा।
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