कुरान - 29:30 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
قَالَ رَبِّ ٱنصُرۡنِي عَلَى ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡمُفۡسِدِينَ

Transliteration: (Qaala Rabbin surnee 'alal qawmil mufsideen (section 3))

उन्होंने दुआ की, 'ऐ मेरे रब! इन फ़साद फैलाने वाले लोगों के मुक़ाबले में मेरी मदद फ़रमा [70]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 30

"उन्होंने दुआ की, 'ऐ मेरे रब! इन फ़साद फैलाने वाले लोगों के मुक़ाबले में मेरी मदद फ़रमा [70]।'"

[70] हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की बद-दुआ

जब क़ौम की सरकशी हद से बढ़ गई और उन्होंने नबी का मज़ाक़ उड़ाते हुए अज़ाब का मुतालबा किया, तो हज़रत लूत ने आजिज़ आकर अल्लाह की बारगाह में मदद की दुआ फ़रमाई।

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