कुरान - 29:29 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
أَئِنَّكُمۡ لَتَأۡتُونَ ٱلرِّجَالَ وَتَقۡطَعُونَ ٱلسَّبِيلَ وَتَأۡتُونَ فِي نَادِيكُمُ ٱلۡمُنكَرَۖ فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوۡمِهِۦٓ إِلَّآ أَن قَالُواْ ٱئۡتِنَا بِعَذَابِ ٱللَّهِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ

Transliteration: (A'innakum la ta'toonar rijaala wa taqta'oonas sabeela wa ta'toona fee naadeekumul munkara famaa kaana jawaaba qawmiheee illaaa an qaalu' tinaaa bi'azaabil laahi in kunta minas saadiqeen)

क्या तुम मर्दों के पास शहवत से आते हो [67], और रास्ते काटते (डाके डालते) हो [68], और अपनी महफ़िलों में बेहयाई (बुरे काम) करते हो [69]?' तो उनकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने कहा, 'हम पर अल्लाह का अज़ाब ले आओ अगर तुम सच्चे हो!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 29

"क्या तुम मर्दों के पास शहवत से आते हो [67], और रास्ते काटते (डाके डालते) हो [68], और अपनी महफ़िलों में बेहयाई (बुरे काम) करते हो [69]?' तो उनकी क़ौम का जवाब इसके सिवा कुछ न था कि उन्होंने कहा, 'हम पर अल्लाह का अज़ाब ले आओ अगर तुम सच्चे हो!'"

[67] क़ौमे लूत की ख़बीस आदतें

वे फ़ितरत के ख़िलाफ़ औरतों को छोड़कर मर्दों के पास शहवत के लिए जाते थे, जिससे इंसानी नसल का निज़ाम दरहम-बरहम होता था।

[68] रास्ते काटना और राहगीरों को लूटना

वे मुसाफ़िरों पर डाके डालते थे और जो परदेसी उनकी बस्ती से गुज़रता, उसके साथ बद-फ़ेली करने की कोशिश करते थे जिससे रास्ते बंद हो गए।

[69] महफ़िलों में खुले-आम बे-शर्मी

वे अपनी मजलिसों में कंकड़ मारना, सीटी बजाना, बद-कलामी और खुले-आम बे-हयाई के काम करते थे और इसे अपनी महफ़िल की रौनक़ समझते थे।

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