कुरान - 29:31 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
وَلَمَّا جَآءَتۡ رُسُلُنَآ إِبۡرَٰهِيمَ بِٱلۡبُشۡرَىٰ قَالُوٓاْ إِنَّا مُهۡلِكُوٓاْ أَهۡلِ هَٰذِهِ ٱلۡقَرۡيَةِۖ إِنَّ أَهۡلَهَا كَانُواْ ظَٰلِمِينَ

Transliteration: (Wa lammaa jaaa'at Rusulunaaa Ibraaheema bil bushraa qaalooo innaa muhlikoo ahli haazihil qaryati inna ahlahaa kaanoo zaalimeen)

और जब हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते [71] इब्राहीम के पास बशारत (ख़ुशख़बरी) लेकर आए [72], तो उन्होंने कहा, 'हम इस बस्ती वालों को हलाक करने वाले हैं [73]; बेशक इसके बाशिंदे सख़्त ज़ालिम हैं [74]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 31

"और जब हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते [71] इब्राहीम के पास बशारत (ख़ुशख़बरी) लेकर आए [72], तो उन्होंने कहा, 'हम इस बस्ती वालों को हलाक करने वाले हैं [73]; बेशक इसके बाशिंदे सख़्त ज़ालिम हैं [74]।'"

[71] अज़ाब और बशारत के फ़रिश्ते

हज़रत जिब्रील, मीकाईल और इसराफ़ील अलैहिमुस्सलाम ख़ूबसूरत इंसानी शक्ल में हज़रत इब्राहीम के पास आए।

[72] नेक बेटे की ख़ुशख़बरी

पहले उन्होंने हज़रत इब्राहीम को हज़रत इसहाक़ की पैदाइश की बशारत दी।

[73] सदूम की हलाकत का एलान

फिर उन्होंने बताया कि हम सदूम की बस्ती पर अज़ाब नाज़िल करके उसे उलट देने के लिए भेजे गए हैं।

[74] ज़ुल्म की इंतहा

फ़रिश्तों ने फ़रमाया कि वे लोग नाफ़रमानी और ज़ुल्म में हद से गुज़र चुके हैं और अब उन पर अज़ाब का फ़ैसला अटल है।

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