Transliteration: (Wa lammaa jaaa'at Rusulunaaa Ibraaheema bil bushraa qaalooo innaa muhlikoo ahli haazihil qaryati inna ahlahaa kaanoo zaalimeen)
"और जब हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते [71] इब्राहीम के पास बशारत (ख़ुशख़बरी) लेकर आए [72], तो उन्होंने कहा, 'हम इस बस्ती वालों को हलाक करने वाले हैं [73]; बेशक इसके बाशिंदे सख़्त ज़ालिम हैं [74]।'"
हज़रत जिब्रील, मीकाईल और इसराफ़ील अलैहिमुस्सलाम ख़ूबसूरत इंसानी शक्ल में हज़रत इब्राहीम के पास आए।
पहले उन्होंने हज़रत इब्राहीम को हज़रत इसहाक़ की पैदाइश की बशारत दी।
फिर उन्होंने बताया कि हम सदूम की बस्ती पर अज़ाब नाज़िल करके उसे उलट देने के लिए भेजे गए हैं।
फ़रिश्तों ने फ़रमाया कि वे लोग नाफ़रमानी और ज़ुल्म में हद से गुज़र चुके हैं और अब उन पर अज़ाब का फ़ैसला अटल है।
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