कुरान - 29:33 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
وَلَمَّآ أَن جَآءَتۡ رُسُلُنَا لُوطٗا سِيٓءَ بِهِمۡ وَضَاقَ بِهِمۡ ذَرۡعٗاۖ وَقَالُواْ لَا تَخَفۡ وَلَا تَحۡزَنۡ إِنَّا مُنَجُّوكَ وَأَهۡلَكَ إِلَّا ٱمۡرَأَتَكَ كَانَتۡ مِنَ ٱلۡغَٰبِرِينَ

Transliteration: (Wa lammaaa an jaaa'at Rusulunaa Lootan seee'a bihim wa daaqa bihim zar'anw wa qaaloo laa takhaf wa laa tahzan innaa munajjooka wa ahlaka illam ra ataka kaanat minal ghaabireen)

और जब हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते [79] लूत के पास आए, तो वे उनकी वजह से ग़मगीन हुए और उनके आने से तंगदिल (परेशान) हुए [80]; फ़रिश्तों ने कहा, 'डरो मत और न ग़म करो; बेशक हम आपको और आपके घर वालों को बचा लेंगे [81], [82] सिवाय आपकी बीवी के, वह पीछे रह जाने वालों में से है [83]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 33

"और जब हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते [79] लूत के पास आए, तो वे उनकी वजह से ग़मगीन हुए और उनके आने से तंगदिल (परेशान) हुए [80]; फ़रिश्तों ने कहा, 'डरो मत और न ग़म करो; बेशक हम आपको और आपके घर वालों को बचा लेंगे [81], [82] सिवाय आपकी बीवी के, वह पीछे रह जाने वालों में से है [83];"

[79] ख़ूबसूरत नौजवानों की शक्ल में फ़रिश्ते

फ़रिश्ते जब निहायत हसीन नौजवानों के रूप में हज़रत लूत के घर मेहमान बनकर आए, तो हज़रत लूत को अपनी बद-फ़ेल क़ौम का सख़्त डर हुआ कि वे इन मेहमानों की बे-हुरमती करने न आ जाएं।

[80] मेहमानों की इज़्ज़त की फ़िक्र

वे दिल में बेहद रंजीदा और परेशान हुए कि मैं तन्हा इन बद-क़िरदारों के मुक़ाबले में अपने मेहमानों की हिफ़ाज़त कैसे करूँगा।

[81–82] फ़रिश्तों का असल हक़ीक़त खोलना

फ़रिश्तों ने अपना भेद खोला कि ऐ अल्लाह के नबी! घबराइए नहीं, हम इंसान नहीं बल्कि आपके रब के फ़रिश्ते हैं; ये बदबख़्त हम तक कभी नहीं पहुंच सकते।

[83] काफ़िरा बीवी का अंजाम

फ़रिश्तों ने फ़रमाया कि आप रात के पिछले पहर अपने मोमिन घर वालों को लेकर निकल जाएं, मगर आपकी बीवी नहीं बचेगी।

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