कुरान - 29:34 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
إِنَّا مُنزِلُونَ عَلَىٰٓ أَهۡلِ هَٰذِهِ ٱلۡقَرۡيَةِ رِجۡزٗا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ بِمَا كَانُواْ يَفۡسُقُونَ

Transliteration: (Innaa munziloona 'alaaa ahli haazihil qaryati rijzan minas samaaa'i bimaa kaanoo yafsuqoon)

बेशक हम इस बस्ती वालों पर आसमान से एक अज़ाब नाज़िल करने वाले हैं [84], उस नाफ़रमानी के बाइस जो ये करते रहे हैं।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 34

"बेशक हम इस बस्ती वालों पर आसमान से एक अज़ाब नाज़िल करने वाले हैं [84], उस नाफ़रमानी के बाइस जो ये करते रहे हैं।'"

[84] पत्थरों की बारिश और बस्ती का उलटना

अल्लाह तआला ने हज़रत जिब्रील के पर के ज़रिए सदूम की पाँचों बस्तियों को आसमान तक उठाया और फिर औंधा करके ज़मीन पर पटक दिया, और ऊपर से गंधक और पकी हुई मिट्टी के पत्थरों की बारिश बरसाई जिस पर हर मुजरिम का नाम लिखा था।

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