कुरान - 29:32 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
قَالَ إِنَّ فِيهَا لُوطٗاۚ قَالُواْ نَحۡنُ أَعۡلَمُ بِمَن فِيهَاۖ لَنُنَجِّيَنَّهُۥ وَأَهۡلَهُۥٓ إِلَّا ٱمۡرَأَتَهُۥ كَانَتۡ مِنَ ٱلۡغَٰبِرِينَ

Transliteration: (Qaala inna feeha Lootaa; qaaloo nahnu a'lamu biman feehaa lanunajjjiyannahoo wa ahlahooo illam ra atahoo kaanat minal ghaabireen)

इब्राहीम ने कहा, 'उसमें तो लूत भी हैं [75]!' उन्होंने कहा, 'हम ख़ूब जानते हैं [76] जो कोई उसमें है; हम ज़रूर उन्हें और उनके घर वालों को बचा लेंगे [77] सिवाय उनकी बीवी के, वह पीछे रह जाने (हलाक होने) वालों में से है [78]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 32

"इब्राहीम ने कहा, 'उसमें तो लूत भी हैं [75]!' उन्होंने कहा, 'हम ख़ूब जानते हैं [76] जो कोई उसमें है; हम ज़रूर उन्हें और उनके घर वालों को बचा लेंगे [77] सिवाय उनकी बीवी के, वह पीछे रह जाने (हलाक होने) वालों में से है [78]।'"

[75] हज़रत इब्राहीम की शफ़क़त और फ़िक्र

हज़रत इब्राहीम ने फ़रमाया कि उस बस्ती में तो अल्लाह के मुक़र्रब नबी हज़रत लूत और उनका ख़ानदान आबाद है, कहीं अज़ाब की लपेट में वे भी न आ जाएं!

[76] फ़रिश्तों का इत्मीनान दिलाना

फ़रिश्तों ने अर्ज़ किया कि हम अच्छी तरह जानते हैं कि वहाँ कौन मोमिन है और कौन काफ़िर।

[77] नबी और मोमिनीन की हिफ़ाज़त

अल्लाह का यह क़ानून है कि अज़ाब आने से पहले नबियों और ईमान वालों को सलामती के साथ बस्ती से निकाल लिया जाता है।

[78] लूत अलैहिस्सलाम की बीवी की हलाकत

हज़रत लूत की बीवी (वाइला) दिल से काफ़िर थी और नबी के घर में रहकर काफ़िरों की जासूसी करती थी, इसलिए वह अज़ाब के पत्थरों से हलाक की गई।

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