कुरान - 7:100 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

100
أَوَلَمۡ يَهۡدِ لِلَّذِينَ يَرِثُونَ ٱلۡأَرۡضَ مِنۢ بَعۡدِ أَهۡلِهَآ أَن لَّوۡ نَشَآءُ أَصَبۡنَٰهُم بِذُنُوبِهِمۡۚ وَنَطۡبَعُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ فَهُمۡ لَا يَسۡمَعُونَ

Transliteration: (Awa lam yahdi lillazeena yarisoonal arda mim ba'di ahlihaaa al law nashaaa'u asabnaahum bizunoobihim; wa natba'u 'alaa quloobihim fahum laa yasma'oon)

यह उन्हें मार्गदर्शन क्यों न बना कि जो लोग धरती के वारिस बने अपने पूर्ववर्तियों के बाद, कि यदि हम चाहें तो उनके गुनाहों के कारण उन्हें भी दुखदायी अज़ाब में डाल दें? और हमने उनके दिलों पर मुहर लगा दी [235], ताकि वे सुन न सकें। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 100 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 100 की तफ़्सीर

 

✅ [234] पिछली क़ौमों की तबाही से सीखने की नसीहत

इस आयत में उन लोगों को चेतावनी दी गई है जो उन बर्बाद हो चुकी क़ौमों की ज़मीन के वारिस बने। जिस तरह पहले लोग अपने गुनाहों की वजह से हलाक किए गए, वैसे ही ये लोग भी तबाह किए जा सकते हैं। मक्का के लोग उन ज़मीनों के वारिस थे जहाँ पहले पाप करने वाले रह चुके थे। यह याद दिलाया गया है कि इख़्तियार और हुकूमत अस्थायी हैं—आज के हाकिम कल का इतिहास बन सकते हैं। ज़मीन तो विरासत में मिली, लेकिन उससे सबक़ नहीं लिया गया। यह आयत तकब्बुर और स्थायित्व के भ्रम से बचने की चेतावनी देती है।

✅ [235] दिल पर मुहर लग जाना—रूहानी बहरापन

जब लोग लगातार नसीहतों और अलामतों को नज़रअंदाज़ करते हैं, तो अल्लाह उनके दिलों पर मुहर लगा देता है। फिर वे न समझ पाते हैं, न तौबा कर सकते हैं, न हक़ की तरफ़ लौट सकते हैं। यह सज़ा बेवजह नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई ग़फ़लत का नतीजा होती है। दिल की संवेदनशीलता ख़त्म हो जाती है, और हिदायत पहुँचनी बंद हो जाती है, जिससे एक तरह का अख़लाक़ी बहरापन पैदा हो जाता है। इस रूहानी अंधेपन से बचने के लिए इस्लाम में क़ब्रों की ज़ियारत को पसंद किया गया है ताकि मौत की याद दिल में बनी रहे।

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