Transliteration: (Tilkal quraa naqussu 'alaika min ambaaa'ihaa; wa laqad jaaa'at hum Rusuluhum bilbaiyinaati famaa kaanoo liyu'minoo bimaa kazzaboo min qabl; kazaalika yatba'ul laahu 'alaa quloobil kaafireen)
इससे यह बात स्पष्ट होती है कि उन घटनाओं को पढ़ना, जिनकी वजह से क़ौमें हलाक हुईं, सबक़ लेने और चेतावनी पाने का बेहतरीन ज़रिया है। इसी तरह पैग़म्बरों और अल्लाह के नेक बंदों की ज़िंदगियों को पढ़ना भी ज़रूरी है ताकि इबादत का जज़्बा पैदा हो। ये क़िस्से सिर्फ़ इतिहास नहीं हैं, बल्कि हर दौर के लिए नैतिक रहनुमा हैं।
इससे ये मालूम होता है कि अल्लाह के रसूल का अपमान करना या उनसे दुश्मनी रखना, दिल पर मुहर लगने का सबब बनता है। अल्लाह हमें इससे महफूज़ रखे। यह मुहर उस ज़ंग की तरह होती है जो लोहे को खा जाती है—ईमान की गिरावट अंदर से शुरू होती है। अगर कोई लगातार नबी की बातों को झुठलाता है, तो यह रूहानी तौर पर ऐसा ज़ंग बन जाता है जो दिल को बर्बाद कर देता है।
यह बात समझ में आती है कि नबी का विरोध करने से इंसान का दिल सख़्त हो जाता है, और फिर वह हिदायत पाने की सलाहियत खो देता है। ऐसे लोग जो हुज़ूर ﷺ से कोई ताल्लुक़ नहीं रखते, उनका क़ुरआन को समझना भी एकतरफा और ग़लत दिशा में चला जाता है। अल्लाह हमें इस बदक़िस्मती से बचाए और हमारे दिलों को हक़ के लिए नरम और कुबूल करने वाला बनाए।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat