कुरान - 7:103 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

103
ثُمَّ بَعَثۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِم مُّوسَىٰ بِـَٔايَٰتِنَآ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِۦ فَظَلَمُواْ بِهَاۖ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُفۡسِدِينَ

Transliteration: (Summa ba'asnaa mim ba'dihim Moosaa bi Aayaatinaaa ilaa Fir'awana wa mala'ihee fazalamoo bihaa fanzur kaifa kaana 'aaqibatul mufsideen)

फिर उनके बाद हमने मूसा को फ़िरऔन और उसके सरदारों की ओर अपनी निशानियों के साथ भेजा [240], मगर उन्होंने उन निशानियों पर ज़ुल्म किया। तो देखो उन फ़साद करने वालों का अंजाम कैसा हुआ। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 103 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 103 की तफ़्सीर

 

✅ [240] मूसा का फ़िरऔन की तरफ़ पैग़म्बरी मिशन

पहले आने वाले पैग़म्बरों के बाद, अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम को फ़िरऔन और उसके अमीरों की तरफ़ भेजा—वे खुली निशानियाँ और मोज़िज़े लेकर आए, ताकि उन्हें हक़ की तरफ़ बुलाएँ और तौहीद क़ायम करें। लेकिन उन्होंने इन निशानियों को मानने की बजाय इनकार और ज़ुल्म से काम लिया। इस आयत के अंत में एक ज़ोरदार चेतावनी है: देखो उन फ़साद फैलाने वालों का अंजाम क्या हुआ, क्योंकि अल्लाह की बातों को झुठलाने का नतीजा हमेशा तबाही और बर्बादी ही होता है।

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