और मूसा ने कहा: “ऐ फ़िरऔन! मैं सारे जहानों के रब की तरफ़ से भेजा गया रसूल हूँ” [241]।
इस आयत से पता चलता है कि हिदायत की पहली सीढ़ी यह है कि रसूल को पहचाना जाए। जब मूसा अलैहिस्सलाम फ़िरऔन के सामने खड़े हुए, तो उन्होंने सबसे पहले अपनी रसूलियत का एलान किया—न कोई कानून पेश किया, न मोज़िज़ा, बल्कि पहले अपनी पहचान बताई कि वे अल्लाह के भेजे हुए हैं। जब तक कोई रसूल को नहीं मानता, तब तक वह अल्लाह के पैग़ाम को नहीं मान सकता। इसी तरह हमारे प्यारे नबी ﷺ भी अपने शुरुआती दावत के दौर में फ़रमाते थे: “पहले मुझे पहचानो—तुम मुझे कैसा पाते हो?” यानी ईमान की बुनियाद रसूल की सच्चाई और अमानतदारी को मानना है।
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सूरह अल-आराफ आयत 104 तफ़सीर