कुरान - 7:102 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

102
وَمَا وَجَدۡنَا لِأَكۡثَرِهِم مِّنۡ عَهۡدٖۖ وَإِن وَجَدۡنَآ أَكۡثَرَهُمۡ لَفَٰسِقِينَ

अनुवाद -

और हमने उनमें से अधिकांश को वचन का सच्चा नहीं पाया [239], बल्कि हमने तो उनमें से अधिकतर को हद्द से बढ़ने वाला पाया।

सूरह अल-आराफ आयत 102 तफ़सीर


📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 102 की तफ़्सीर

 

✅ [239] मुश्किल में किया गया झूठा वादा

यह आयत उन लोगों की मुनाफ़िक़त को उजागर करती है जो मुसीबत के वक़्त वादे तो करते हैं, लेकिन जैसे ही आसानी मिलती है, वो अपने वादे तोड़ देते हैं। मक्का के कुफ्फ़ार जब किसी मुश्किल में फँसते, तो कहते कि अगर अल्लाह ने उन्हें बचा लिया तो वे ईमान ले आएँगे, लेकिन जब राहत मिल जाती, तो वही कुफ्र और नाफ़रमानी की राह फिर से पकड़ लेते। यह रवैया इख़लास की कमी और गहरी नैतिक गिरावट को दर्शाता है—ऐसे लोग अल्लाह को मुसीबत में याद करते हैं, मगर मोहब्बत और बंदगी से नहीं।

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