कुरान - 7:99 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

99
أَفَأَمِنُواْ مَكۡرَ ٱللَّهِۚ فَلَا يَأۡمَنُ مَكۡرَ ٱللَّهِ إِلَّا ٱلۡقَوۡمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ

Transliteration: (Afa aminoo makral laah; falaa ya'manu makral laahi illal qawmul khaasiroon)

तो क्या वे अल्लाह की ख़ुफ़िया तदबीर से बे-ख़ौफ़ हो गए हैं? पस अल्लाह की ख़ुफ़िया तदबीर से ख़सारा उठाने वाले लोगों के सिवा कोई बे-ख़ौफ़ नहीं होता। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 99 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 99

✅ मकरे इलाही से बे-ख़ौफ़ी ख़सारे की अलामत

अल्लाह की पकड़ और उसकी मुहलत से महज़ वही बे-ख़ौफ़ होते हैं जो हलाकत और ख़सारे के मुस्तहिक़ हैं; मोमिन हमेशा उसके ख़ौफ़ और रज़ा के दरमियान रहता है।

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