फ़िरऔन की क़ौम के सरदारों ने कहा: "बेशक, यह तो एक बड़ा माहिर जादूगर है" [246]।
मूसा अलैहिस्सलाम के खुले मोज़िज़े देखने के बावजूद, फ़िरऔन के दरबारियों ने उन्हें जादू का नाम दे दिया। उन्होंने दावा किया कि मूसा ने मिस्र से बाहर रहकर जादू सीखा है, और अब वह एक माहिर जादूगर बनकर लौटा है। यह उनका तकब्बुर और हक़ से इंकार था—वे सच को जान-बूझकर झूठी कहानियों से दबा रहे थे।
इसके उलट, हमारे नबी ﷺ मक्का में ही पूरी ज़िंदगी रहे, ताकि कोई उन पर इल्म छुपकर सीखने का इल्ज़ाम न लगा सके।
यह रवैया दिखाता है कि गुरूर और हठधर्मी इंसान को हक़ की रौशनी देखने से अंधा कर देती है, चाहे वो सच्चाई उसके सामने ही क्यों न हो।
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सूरह अल-आराफ आयत 109 तफ़सीर