Transliteration: (Fa alqaa 'asaahu fa izaa hiya su'baanum mubeen)
फ़िरऔन की चुनौती के जवाब में, मूसा अलैहिस्सलाम ने अपना अस़ा फेंका, जो उसी वक़्त ज़िंदा और साफ़ नज़र आने वाला अजदहा बन गया। यह कोई जादू नहीं था—यह एक खुला, ज़ाहिरी मोज़िज़ा था, जो अक़्ल और तर्क से परे था। इस मोज़िज़े ने फ़िरऔन और उसके दरबारियों के दिलों में डर बिठा दिया। यह साबित हुआ कि मूसा कोई जादूगर नहीं, बल्कि अल्लाह के भेजे हुए सच्चे रसूल थे, जिनके साथ रब्बुल आलमीन की ताक़त थी। यह मोज़िज़ा इतना असरदार और हैरतअंगेज़ था कि उसने महल के तकब्बुर को हिला कर रख दिया।
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