कुरान - 7:13 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
قَالَ فَٱهۡبِطۡ مِنۡهَا فَمَا يَكُونُ لَكَ أَن تَتَكَبَّرَ فِيهَا فَٱخۡرُجۡ إِنَّكَ مِنَ ٱلصَّـٰغِرِينَ

Transliteration: (Qaala fahbit minhaa famaa yakoonu laka an tatakabbara feehaa fakhruj innaka minas saaghireen)

वह (अल्लाह) बोला, “तू यहाँ से उतर जा; यहाँ घमण्ड करना तेरे लिए नहीं है। तो निकल जा; निस्संदेह, तू रुस्वा लोगों में से है” [19] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 13 की तफ़्सीर

 

✅ [19] जन्नत का पहले से मौजूद होना और उसका ऊपरी मुकाम

“यहाँ से” का इशारा जन्नत की तरफ़ है। इससे मालूम हुआ कि जन्नत पहले से मौजूद थी और वह ऊपर है, ज़मीन के नीचे नहीं, क्योंकि उतारना हमेशा ऊँचाई से निचाई की तरफ़ होता है। यह भी जानना चाहिए कि जब से शैतान ने सज्दा से इंकार किया, उसी वक्त उसे जन्नत से निकाला गया, लेकिन वह छुपकर दाख़िल होने की कोशिश करता रहा। हज़रत मुहम्मद ﷺ की तशरीफ़आवरी के बाद शैतान हमेशा के लिए जन्नत से महरूम कर दिया गया।

✅ [20] इब्लिस का जन्नत में मुक़ाम और रुतबा

इससे यह भी मालूम हुआ कि लानती होने से पहले शैतान जन्नत में ही रहता था, वरना निकाले जाने का कोई मतलब न होता। साथ ही, उसे एक इज़्ज़त और रुतबा भी हासिल था, वरना रुसवाई का हुक्म उसके हक़ में बेमानी होता। मशहूर है कि वह फ़रिश्तों का उस्ताद था, इसी वजह से उसे “मु‘ल्लिमुल मलाकूत” कहा जाता था।

✅ [21] तकब्बुर का अंजाम रुसवाई

इससे यह हिदायत मिलती है कि हर विरोधी की दलील का जवाब देना ज़रूरी नहीं। अल्लाह तआला ने शैतान की दलील का कोई जवाब न दिया, बल्कि उसे लानतज़दा कर के निकाल दिया। इससे साबित होता है कि तकब्बुर और घमण्ड का अंजाम रुसवाई ही है।

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