कुरान - 7:15 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
قَالَ إِنَّكَ مِنَ ٱلۡمُنظَرِينَ

Transliteration: (Qaala innaka minal munzareen)

उसने (अल्लाह ने) कहा: "तुझे मोहलत दी गई" [23] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 15 की तफ़्सीर

 

✅ [23] मोहलत पहले सूर की आवाज़ तक और दुआ की असरअंदाज़ी

इससे मुराद है कि शैतान को पहले सूर फूंके जाने तक मोहलत दी गई। जब पहला सूर फूंका जाएगा तो शैतान बाक़ी मख़लूक़ात के साथ हलाक कर दिया जाएगा। यानी अल्लाह तआला ने शैतान की दुआ क़ुबूल फ़रमाई, मगर कुछ तब्दीली के साथ।

इससे दो अहम बातें मालूम होती हैं:

  1. कभी-कभी कुफ़्फ़ार की दुआएँ भी क़ुबूल होती हैं, जैसे शैतान की दुआ क़ुबूल हुई लेकिन नतीजा उसकी मरज़ी के मुताबिक़ न था।
  2. दुआ उम्र में इज़ाफ़ा करती है। जब लईन शैतान की ज़िंदगी दुआ से बढ़ाई गई, तो फिर अंबिया, औलिया और नेक लोगों की दुआओं और अच्छे आमाल से उम्र में इज़ाफ़ा होना कोई तअज्जुब की बात नहीं।

ताक़दीर (क़ज़ा-ओ-क़दर) में तब्दीली की तफ़सील के लिए किताबें असरारुल अहकाम और तफ़्सीर नयीमी देखी जा सकती हैं।

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