Transliteration: (Qaala fabimaaa aghway tanee la aq'udanna lahum Siraatakal Mustaqeem)
इससे यह सबक़ मिलता है कि सच को भी बेअदबी से कहना कुफ्र का कारण बन सकता है। यद्यपि अल्लाह तआला ही हिदायत और गुमराही का कारण बनाते हैं, लेकिन उसका इल्ज़ाम अल्लाह पर लगाना, जैसा कि शैतान ने किया, बेअदबी और कुफ्र है। इसी बयान की वजह से वह और ज़्यादा मलऊन हो गया। इसके मुक़ाबले में हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) ने कहा: हमने अपने ऊपर ज़ुल्म किया, तो उन्हें माफ़ कर दिया गया।
इस आयत का मतलब है: आदम (अलैहिस्सलाम) के बेटे-बेटियों से बदला लेने के लिए, शैतान ने ठान लिया कि वह उनके दिलों में लालच और डर पैदा करेगा, उन्हें गुनाह की तरफ़ ले जाएगा, और नेकी के कामों से रोकेगा। उसका इरादा था कि कुछ को कुफ्र और शिर्क में डाल दे, ताकि वह अकेले जहन्नम न जाए, बल्कि बड़ी तादाद को साथ ले जाए।
इससे दो बातें सामने आती हैं:
झूठी परहेज़गारी इतनी शर्मनाक चीज़ है कि शैतान ने भी अल्लाह के सामने उसका नाटक नहीं किया। जो कुछ उसके दिल में था, उसने खुलकर कह दिया।
शैतान इंसानों और ईमान वाले जिन्नों का असली दुश्मन है, क्योंकि ये भी इम्तिहान और ईमान के दायरे में आते हैं। वह फ़रिश्तों या हूरों का दुश्मन नहीं, इसलिए अल्लाह ने "उनके लिए" शब्द इस्तेमाल किया।
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