Transliteration: (Summa la aatiyannahum mim baini aideehim wa min khalfihim wa 'an aimaanihim wa 'an shamaaa'ilihim wa laa tajidu aksarahum shaakireen)
यहाँ ऊपर और नीचे का उल्लेख नहीं किया गया है, क्योंकि आमतौर पर हमला या बहकावा इन्हीं चार दिशाओं से होता है — आगे, पीछे, दाएँ और बाएँ। ये ही वे मुख्य रास्ते हैं जिनसे दुनियावी गुमराहियाँ और फितने आते हैं, और शैतान इन्हीं के ज़रिए इंसान को बहकाता है।
इससे पता चलता है कि शैतान को भी कुछ ग़ैब की जानकारी दी गई थी, क्योंकि उसने यह भविष्यवाणी की कि ज़्यादातर इंसान शुक्रगुज़ार नहीं होंगे। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: और मेरे बन्दों में बहुत थोड़े ही शुक्र करने वाले हैं (सूरा सबा 34:13)।
शैतान एक बीमारी है, और रसूलुल्लाह ﷺ उसका इलाज हैं। अगर बीमारी (शैतान) इतनी ताक़तवर है, तो रसूलुल्लाह ﷺ का इल्म और हिदायत उससे कहीं ज़्यादा असरदार और ताक़तवर है।
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