Transliteration: (Wa yaaa Aadamus kun anta wa zawjukal Jannata fakulaa min haisu shi'tumaa wa laa taqrabaa haazihish shajarata fatakoonaa minaz zaalimeen)
यहाँ "रहना" से मुराद अस्थायी क़याम है, क्योंकि आदम (अलैहिस्सलाम) को धरती की ख़िलाफ़त के लिए पैदा किया गया था। उन्हें जन्नत में प्रशिक्षण के लिए रखा गया, ताकि वह दुनिया को जन्नत जैसा बनाने का मॉडल सीखें, और अपनी औलाद को भी उसी रास्ते पर चलने की हिदायत दें।
इससे पता चलता है कि जन्नत के फल पहले से मोजूद हैं, और कुछ चुने हुए अल्लाह के बंदों ने उन्हें इस दुनिया में चखा भी है — जैसे हज़रत मरयम (अलैहिस्सलाम) को जन्नती फल इस दुनिया में मिले।
"इस पेड़" से मुराद गेंहूँ का पेड़ हो सकता है, या कोई और। इसकी असली हकीकत अल्लाह तआला ही बेहतर जानते हैं।
यहाँ "ज़ालिम" कहने का मतलब काफ़िर नहीं है, क्योंकि कुफ्र तो अकीदे की बुराई से पैदा होता है। इस सूरत में "ज़ुल्म" का मतलब है — ग़लती या अल्लाह की नाफ़रमानी।
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