कुरान - 7:19 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
وَيَـٰٓـَٔادَمُ ٱسۡكُنۡ أَنتَ وَزَوۡجُكَ ٱلۡجَنَّةَ فَكُلَا مِنۡ حَيۡثُ شِئۡتُمَا وَلَا تَقۡرَبَا هَٰذِهِ ٱلشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Wa yaaa Aadamus kun anta wa zawjukal Jannata fakulaa min haisu shi'tumaa wa laa taqrabaa haazihish shajarata fatakoonaa minaz zaalimeen)

और ऐ आदम! तू और तेरी पत्नी जन्नत में रहो [30] और जहाँ से चाहो, खाओ [31], लेकिन इस पेड़ के पास मत जाना [32], वरना तुम ज़ालिमों में से हो जाओगे [33]. (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 19 की तफ़्सीर

 

✅ [30] जन्नत में अस्थायी ठहराव – दुनियावी ज़िंदगी की तैयारी के लिए

यहाँ "रहना" से मुराद अस्थायी क़याम है, क्योंकि आदम (अलैहिस्सलाम) को धरती की ख़िलाफ़त के लिए पैदा किया गया था। उन्हें जन्नत में प्रशिक्षण के लिए रखा गया, ताकि वह दुनिया को जन्नत जैसा बनाने का मॉडल सीखें, और अपनी औलाद को भी उसी रास्ते पर चलने की हिदायत दें।

✅ [31] जन्नत के फल मौजूद हैं और कुछ लोगों ने उन्हें चखा है

इससे पता चलता है कि जन्नत के फल पहले से मोजूद हैं, और कुछ चुने हुए अल्लाह के बंदों ने उन्हें इस दुनिया में चखा भी है — जैसे हज़रत मरयम (अलैहिस्सलाम) को जन्नती फल इस दुनिया में मिले।

✅ [32] वह मना किया गया पेड़ कौन सा है – अल्लाह ही बेहतर जानता है

"इस पेड़" से मुराद गेंहूँ का पेड़ हो सकता है, या कोई और। इसकी असली हकीकत अल्लाह तआला ही बेहतर जानते हैं।

✅ [33] ज़ुल्म से मुराद यहाँ कुफ्र नहीं बल्कि नाफ़रमानी है

यहाँ "ज़ालिम" कहने का मतलब काफ़िर नहीं है, क्योंकि कुफ्र तो अकीदे की बुराई से पैदा होता है। इस सूरत में "ज़ुल्म" का मतलब है — ग़लती या अल्लाह की नाफ़रमानी।

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