और जिन लोगों ने हमारी निशानियों को और आख़िरत की मुलाक़ात को झुठला दिया, उनके सारे आमाल मिटा दिए जाएँगे [320]। उन्हें बदले में वही मिलेगा जो वे किया करते थे।
इस आयत में अल्लाह तआला ने बयान किया है कि जिसने अल्लाह की निशानियों और आख़िरत का इंकार किया, उसकी सारी नेकियाँ बेकार हो जाती हैं। चाहे उसने कितने ही नेक काम किए हों, कुफ़्र की वजह से उनका कोई अजर नहीं मिलेगा।
लेकिन उनके गुनाह बाक़ी रहते हैं और उनका पूरा हिसाब लिया जाएगा। इसके बरअक्स, अगर कोई काफ़िर ईमान ले आए तो उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं और उसने पहले जो अच्छे काम किए थे, वह सब उसके हक़ में लिखे रहते हैं।
इस तरह यह आयत साबित करती है कि ईमान ही असल शर्त है, जिसके बिना कोई भी नेक अमल आख़िरत में क़ीमत नहीं रखता। हर शख़्स को वही बदला मिलेगा जो उसने कमाया, लेकिन उसका पाएदार सिला सिर्फ़ ईमान के साथ ही मिलेगा।
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सूरह अल-आराफ आयत 147 तफ़सीर