कुरान - 7:150 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

150
وَلَمَّا رَجَعَ مُوسَىٰٓ إِلَىٰ قَوۡمِهِۦ غَضۡبَٰنَ أَسِفٗا قَالَ بِئۡسَمَا خَلَفۡتُمُونِي مِنۢ بَعۡدِيٓۖ أَعَجِلۡتُمۡ أَمۡرَ رَبِّكُمۡۖ وَأَلۡقَى ٱلۡأَلۡوَاحَ وَأَخَذَ بِرَأۡسِ أَخِيهِ يَجُرُّهُۥٓ إِلَيۡهِۚ قَالَ ٱبۡنَ أُمَّ إِنَّ ٱلۡقَوۡمَ ٱسۡتَضۡعَفُونِي وَكَادُواْ يَقۡتُلُونَنِي فَلَا تُشۡمِتۡ بِيَ ٱلۡأَعۡدَآءَ وَلَا تَجۡعَلۡنِي مَعَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Wa lammaa raja'a Moosaaa ilaa qawmihee ghadbaana asifan qaala bi'samaa khalaftumoonee min ba'dee 'a-'ajiltum amra Rabbikum wa alqal alwaaha wa akhaza bira'si akheehi yajurruhoo ilaiyh; qaalab na umma innal qawmas tad'afoonee wa kadoo yaqtu loonanee; falaa tushmit biyal a'daaa'a wa laa taj'alnee ma'al qawmiz zaalimeen)

और जब मूसा अपनी क़ौम की तरफ़ ग़ुस्से [327] और ग़म से भरे हुए लौटे, तो उन्होंने कहा:
"तुमने मेरे पीछे बहुत बुरा काम किया [328]। क्या तुमने अपने रब के हुक्म पर जल्दीबाज़ी की?"
फिर उन्होंने तख़्तियाँ पटक दीं [329] और अपने भाई (हारून) को अपनी तरफ़ खींचने लगे [330], यहाँ तक कि उन्होंने उसकी दाढ़ी पकड़ ली।
हारून ने कहा:
"ऐ मेरी माँ के बेटे! क़ौम ने मुझे कमज़ोर समझ लिया और मुझे क़त्ल करने पर आमादा हो गए [331]। तो दुश्मनों को मुझ पर हँसने का मौक़ा मत दे और मुझे ज़ालिमों के साथ शामिल न कर।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 150 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ‘राफ़ – आयत 150 की तफ़्सीर

✅ [327] मूसा का ग़ुस्सा

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) जब लौटे तो उन्हें सामरी और उसकी गुमराही पर शदीद ग़ुस्सा आया। यह ग़ुस्सा उनके भाई हारून (अलैहिस्सलाम) पर नहीं था, बल्कि अल्लाह के लिए था।

✅ [328] जिम्मेदारी की ताकीद

उन्होंने अपनी क़ौम और हारून (अलैहिस्सलाम) दोनों को संबोधित किया। इससे सबक़ मिलता है कि सिर्फ़ अपनी इस्लाह काफ़ी नहीं, बल्कि दूसरों की इस्लाह की कोशिश करना भी ज़रूरी है।

✅ [329] तख़्तियों का पटकना

मूसा (अलैहिस्सलाम) ने ग़ुस्से में तौरात की तख़्तियाँ पटक दीं। यह अल्लाह की किताब की बेअदबी के लिए नहीं था, बल्कि ग़ुस्से के जज़्बात में हुआ। अल्लाह के लिए ग़ुस्सा करना इमान की निशानी है।

✅ [330] हारून की दाढ़ी पकड़ना

हारून (अलैहिस्सलाम) उनसे उम्र में बड़े थे, मगर पैग़म्बराना ज़िम्मेदारी में मूसा (अलैहिस्सलाम) को उनसे अफ़ज़लियत हासिल थी। ग़ुस्से में उन्होंने हारून को खींचा और दाढ़ी पकड़ ली। यह इस बात की दलील है कि अल्लाह के लिए ग़ुस्सा करते हुए इंसान कभी-कभी बेइख़्तियार हो जाता है।

✅ [331] हारून का बचाव

हारून (अलैहिस्सलाम) ने कहा कि क़ौम ने उन्हें कमज़ोर समझा और क़त्ल करने के क़रीब हो गए। इस वजह से उन्होंने चुप्पी इख़्तियार की ताकि मामला और बिगड़े नहीं। इससे सबक़ है कि अगर दावत (tabligh) देने से जान का ख़तरा हो, तो उस वक़्त खामोशी इख़्तियार करना जायज़ है।

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