Transliteration: (Innal lazeenat takhazul 'ijla-sa yanaaluhum ghadabum mir Rabbihim wa zillatun fil hayaatid dunyaa; wa kazaalika najzil muftareen)
यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने बछड़े की पूजा की। अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि उन पर उसका ग़ज़ब और ज़िल्लत (रुसवाई) दुनिया ही में आएगी। समरी, जिसने लोगों को गुमराह किया था, बड़ी रुसवाई की हालत में मरा और आख़िरत में अजाब उसका इंतज़ार कर रहा है। इससे मालूम होता है कि जो लोग दूसरों को गुमराह करते हैं और शिर्क या ग़लत अक़ीदे की दावत देते हैं, उनको अल्लाह तआला दुनिया और आख़िरत दोनों में सख़्त सज़ा देता है।
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