कुरान - 7:152 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

152
إِنَّ ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ ٱلۡعِجۡلَ سَيَنَالُهُمۡ غَضَبٞ مِّن رَّبِّهِمۡ وَذِلَّةٞ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۚ وَكَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلۡمُفۡتَرِينَ

Transliteration: (Innal lazeenat takhazul 'ijla-sa yanaaluhum ghadabum mir Rabbihim wa zillatun fil hayaatid dunyaa; wa kazaalika najzil muftareen)

निश्चित ही जिन लोगों ने बछड़े को (इबादत के लिए) अपना लिया, उन तक उनके रब का ग़ज़ब और दुनिया में रुसवाई पहुँचेगी। और हम ऐसे ही लोगों को बदला देते हैं जो शिर्क और इल्ज़ाम लगाते हैं [334]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 152 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ‘राफ़ – आयत 152 की तफ़्सीर

✅ [334] बुतपरस्ती पर दुनियावी रुसवाई

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने बछड़े की पूजा की। अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि उन पर उसका ग़ज़ब और ज़िल्लत (रुसवाई) दुनिया ही में आएगी। समरी, जिसने लोगों को गुमराह किया था, बड़ी रुसवाई की हालत में मरा और आख़िरत में अजाब उसका इंतज़ार कर रहा है। इससे मालूम होता है कि जो लोग दूसरों को गुमराह करते हैं और शिर्क या ग़लत अक़ीदे की दावत देते हैं, उनको अल्लाह तआला दुनिया और आख़िरत दोनों में सख़्त सज़ा देता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now