Transliteration: (Wa lammaa sakata 'an Moosal ghadabu akhazal alwaaha wa fee nuskhatihaa hudanw wa rahmatul lil lazeena hum li Rabbihim yarhaboon)
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) एक गहरी रूहानी कैफ़ियत में थे। उसी हालत में पट्टिकाएँ फेंक दी गईं। जब यह कैफ़ियत खत्म हुई तो उन्होंने उन्हें अदब के साथ उठा लिया। इससे सबक़ मिलता है कि अगर अल्लाह की किताब ग़फ़लत में गिर जाए तो इसका गुनाह नहीं होता।
पट्टिकाएँ उठाने के बाद उनमें हिदायत और रहमत बाक़ी रही। पहले तौरात में तफ़सील से बहुत कुछ था, मगर इस वाक़ए के बाद वह तफ़सील बाक़ी न रही। यह बताता है कि कुरआन मजीद पूरी और महफ़ूज़ हिदायत है, जबकि तौरात की असली तफ़सीलात महफ़ूज़ न रह सकीं। इसमें कोई तज़ाद नहीं है।
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