कुरान - 7:154 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

154
وَلَمَّا سَكَتَ عَن مُّوسَى ٱلۡغَضَبُ أَخَذَ ٱلۡأَلۡوَاحَۖ وَفِي نُسۡخَتِهَا هُدٗى وَرَحۡمَةٞ لِّلَّذِينَ هُمۡ لِرَبِّهِمۡ يَرۡهَبُونَ

अनुवाद -

और जब मूसा (अलैहिस्सलाम) का ग़ुस्सा ठंडा हुआ तो उन्होंने अलवाह़ (पट्टिकाएँ) [335] उठा लीं। और उनकी लिखावट में उनके रब से डरने वालों के लिए हिदायत और रहमत [336] थी।

सूरह अल-आराफ आयत 154 तफ़सीर


📖 सूरा अल-आ‘राफ़ – आयत 154 की तफ़्सीर

✅ दिव्य ध्यान से वापसी [335]

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) एक गहरी रूहानी कैफ़ियत में थे। उसी हालत में पट्टिकाएँ फेंक दी गईं। जब यह कैफ़ियत खत्म हुई तो उन्होंने उन्हें अदब के साथ उठा लिया। इससे सबक़ मिलता है कि अगर अल्लाह की किताब ग़फ़लत में गिर जाए तो इसका गुनाह नहीं होता।

✅ वह्य का असली मक़सद बाक़ी [336]

पट्टिकाएँ उठाने के बाद उनमें हिदायत और रहमत बाक़ी रही। पहले तौरात में तफ़सील से बहुत कुछ था, मगर इस वाक़ए के बाद वह तफ़सील बाक़ी न रही। यह बताता है कि कुरआन मजीद पूरी और महफ़ूज़ हिदायत है, जबकि तौरात की असली तफ़सीलात महफ़ूज़ न रह सकीं। इसमें कोई तज़ाद नहीं है।

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