Transliteration: (Waktub lanaa fee haazi hid dunyaa hasanatanw wa fil Aakhirati innaa hudnaaa ilaik; qaala 'azaabee useebu bihee man ashaaa'u wa rahmatee wasi'at kulla shai'; fasa aktubuhaa lil lazeena yattaqoona wa yu'toonaz Zakaata wal lazeena hum bi Aayaatinaa yu'minoon)
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने दुआ की कि अल्लाह दुनिया में भी हमें हिदायत, इज़्ज़त और क़दर दे और आख़िरत में मग़फ़िरत और इज़्ज़त बख़्शे।
यह दुआ या तो सत्तर साथियों के लिए थी या पूरी बनी इस्राईल की तरफ़ से। इससे साबित होता है कि अंबिया अपनी उम्मत की तरफ़ से दुआ व शफ़ाअत करते हैं।
अल्लाह ने फ़रमाया कि दुआ तो क़बूल हुई, लेकिन हर एक के लिए नहीं, बल्कि उनके लिए जो नेक अमल करें।
अल्लाह की रहमत दुनिया में सबको मिलती है – रिज़्क़, अम्न व सलामती। लेकिन आख़िरत का सवाब सिर्फ़ मोमिनों और मुत्तक़ी लोगों के लिए है।
यह वादा हज़रत मुहम्मद ﷺ की उम्मत के लिए है, जो तक़वा करते हैं, ज़कात अदा करते हैं और ईमान लाते हैं। इनकी खूबियाँ पिछली किताबों में भी लिखी थीं और इनके ऐब छुपाए गए। यही अल्लाह के महबूब ﷺ की उम्मत है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat