Transliteration: (Allazeena yattabi'oonar Rasoolan Nabiyyal ummiyyal lazee yajidoonahoo maktooban 'indahum fit Tawraati wal Injeeli ya' muruhum bilma'roofi wa yanhaahum 'anil munkari wa yuhillu lahumul taiyibaati wa yuharrimu 'alaihimul khabaaa'isa wa yada'u 'anhum israhum wal aghlaalal latee kaanat 'alaihim; fallazeena aamanoo bihee wa 'azzaroohu wa nasaroohu wattaba'un nooral lazeee unzila ma'ahooo ulaaa'ika humul muflihoon)
हज़रत मुहम्मद ﷺ की विशेषताएँ तौरेत और इंजील में लिखी हुई थीं। बनी इस्राईल को उनके आने की ख़बर दी गई थी। यहाँ सात गुण बताए गए: नबी होना, उम्मी होना, भलाई का हुक्म देना, बुराई से रोकना, बोझ हटाना, ज़रूरतें पूरी करना, रहमत और सुकून का ज़रिया होना।
हज़ारों तहरीफ़ के बावजूद इंजील में बहुत सी आयतें अब भी मौजूद हैं जो पैग़म्बर ﷺ की ख़बर देती हैं। जैसे यूहन्ना (John) 14:16 में "दूसरा मददगार" (Helper) का वादा किया गया है। इसी तरह John 16:7 में कहा गया कि वह मददगार तभी आएगा जब ईसा (अलैहिस्सलाम) चले जाएँगे। ये साफ़ तौर पर पैग़म्बर ﷺ की ओर इशारा है।
वो साफ़-सुथरी चीज़ें जो बनी इस्राईल की नाफ़रमानी की वजह से हराम कर दी गई थीं, पैग़म्बर ﷺ ने फिर हलाल कर दीं।
शराब और दूसरी अपवित्र चीज़ों को पैग़म्बर ﷺ ने हराम ठहराया, जबकि पहले कुछ शरीअतों में इजाज़त थी।
तौरेत के सख़्त हुक्म जैसे तौबा पर मौत, कपड़ों को जलाना, नापाकी पर अंग काटना—ये सब हटाकर इस्लाम में रहमत और आसानी वाला निज़ाम दिया गया।
रसूल ﷺ की ताज़ीम और मदद ईमान का हिस्सा है। हर जायज़ तरीक़े से अदब करना फ़र्ज़ है।
"नूर" से कुरआन और हदीस दोनों मुराद हैं। दोनों की इताअत ज़रूरी है।
यह वही दुआ है जो हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी उम्मत के लिए की थी, लेकिन अल्लाह ने यह शरफ़ उम्मत-ए-मुहम्मद ﷺ को दिया। उनके अच्छे गुण किताबों में लिखे गए, जबकि कमज़ोरियाँ छुपा ली गईं।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat