कुरान - 7:161 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

161
وَإِذۡ قِيلَ لَهُمُ ٱسۡكُنُواْ هَٰذِهِ ٱلۡقَرۡيَةَ وَكُلُواْ مِنۡهَا حَيۡثُ شِئۡتُمۡ وَقُولُواْ حِطَّةٞ وَٱدۡخُلُواْ ٱلۡبَابَ سُجَّدٗا نَّغۡفِرۡ لَكُمۡ خَطِيٓـَٰٔتِكُمۡۚ سَنَزِيدُ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

Transliteration: (Wa iz qeela lahumuskunoo haazihil qaryata wa kuloo minhaa haisu shi'tum wa qooloo hittatunw wadkhulul baaba sujjadan naghfir lakum khateee'aatikum; sanazeedul muhsineen)

और जब उनसे कहा गया: “इस बस्ती में दाख़िल हो जाओ और उसमें जहाँ चाहो, खाओ [367], और कहो: ‘हमारे गुनाह दूर कर दे’ [368], और दरवाज़े में सज्दा करते हुए दाख़िल हो। हम तुम्हारे गुनाह बख़्श देंगे [369] और हम नेकी करने वालों को और ज़्यादा देंगे।” (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 161 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-आ‘राफ़ – आयत 161 की तफ़्सीर

✅ [367] मुक़द्दस शहर में क़याम

यहाँ जिस बस्ती का तज़किरा है, उससे मुराद बैतुल मुक़द्दस (यरुश्लम) है। यह नबियों का शहर है और इसमें रहना अल्लाह की बड़ी नेमत है।

✅ [368] खुली इजाज़त और दुआ का हुक्म

उन्हें इजाज़त थी कि जहाँ चाहें, खेतों और बाग़ों से खाएं। साथ ही हुक्म दिया गया कि अल्लाह से दुआ करें: “हमारे गुनाह दूर कर दे।”

✅ [369] सज्दे और तौबा से मग़फ़िरत

उन्हें कहा गया कि दरवाज़े से सज्दा करते हुए दाख़िल हो और “हित्तह” (हमारे गुनाह बख़्श दे) कहो। लेकिन उन्होंने मज़ाक़ उड़ाया और “हित्तह” की जगह “हिन्तह” (गेंहूँ) कह दिया। इस तरह उन्होंने आख़िरत की मग़फ़िरत के बदले दुनिया की चाहत को तरजीह दी।

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