कुरान - 7:162 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

162
فَبَدَّلَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ مِنۡهُمۡ قَوۡلًا غَيۡرَ ٱلَّذِي قِيلَ لَهُمۡ فَأَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمۡ رِجۡزٗا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ بِمَا كَانُواْ يَظۡلِمُونَ

अनुवाद -

लेकिन उनमें से ज़ालिमों ने उस कलाम को बदल डाला [370], जो उनसे कहा गया था। तो हमने उनकी नाक़सी के बदले उन पर आसमान से आज़ाब उतार दिया [371]।

सूरह अल-आराफ आयत 162 तफ़सीर


सूरा अल-आ‘राफ़ – आयत 162 की तफ़्सीर

✅ [370] अल्लाह के कलाम में तहरीफ़ का नतीजा

उन्होंने तौबा के लिए जो लफ़्ज़ अल्लाह ने बताये थे, उन्हें बदलकर मज़ाक़ बना लिया। इससे सबक़ मिलता है कि अल्लाह और उसके नबी का सिखाया हुआ कलाम ज्यों का त्यों अपनाना चाहिए, उसमें तहरीफ़ करने से असर और बरकत दोनों खत्म हो जाते हैं।

✅ [371] आसमान से अज़ाब – ताऊन की सूरत में

उनकी नाफ़रमानी के सबब अल्लाह ने उन पर आसमान से अज़ाब भेजा। तफ़्सीरों में आता है कि यह अज़ाब ताऊन (प्लेग) की शक्ल में आया, जिससे 24 हज़ार बानी इसराईल हलाक़ हो गए।
इस्लामी तालीमात में ताऊन मुमिनों के लिए रहमत है – जो सब्र करे और उस में वफ़ात पाए, उसे शहीद का दर्जा मिलता है। हदीस शरीफ़ में हुक्म है कि ताऊन वाली जगह में दाख़िल न हो, और अगर अपने शहर में आ जाए तो वहाँ से भागो नहीं।

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